इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड मे हर एक वस्तु तथा हर एक कण का निर्माण ऊर्जा से ही हुआ है
किसी भी तत्व के इलेक्ट्रोन प्रोटोन तथा न्यूट्रॉन अलग कर दिये जायें तो बचेगी सिर्फ और सिर्फ ऊर्जा,
ऊर्जा को नष्ट नही किया जा सकता और न ही उत्पन्न किया जा सकता हूं सिर्फ एक रूप से दूसरे रूप मे बदला जा सकता है
यदि इस ऊर्जा को उत्पन्न नही किया जा सकता तो कहां से आयी यह ऊर्जा?

यह ऊर्जा सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड मे व्याप्त है और इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड मे हो रही हर खगोलीय घटना की जिम्मेदार है
जैसे– किसी ग्रह का बनना तथा नष्ट होना,तारो आदि का चमकना सूरज का रौशनी देना सभी इस ऊर्जा के कारण है

इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड मे एक ही ऊर्जा व्याप्त है जिसे हम ब्रह्माण्डियें ऊर्जा या दिव्य ऊर्जा भी कहते है इसे हम cosmic energy के नाम से जानते है यह ऊर्जा परमपिता परमेश्वर की ही ऊर्जा है जिसे हम अलग-अलग नामो से जानते है
यही वह ऊर्जा है जो इस संसार को चलायमान रखे हुए हैं और जो इस संसार की जरूरत हैं।
इस ऊर्जा की जरूरत मानव ही नही अपितु पेड़-पौधे, वन्य जीव-जंतु यहां तक की भूत-प्रेतों को भी इसी ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं मूक्ति पाने के लिए
जब तक यह ऊर्जा इनमे पूर्ण नही होगी तब तक यह मुक्त नही हो सकते तब तक इन्हे प्रेत योनि मे ही रहना होगा।
साधारण मानव मे कैसे आती है दिव्य ऊर्जा?

एक थका हुआ व्यक्ति जब सोकर जागता है तो बिल्कल तरो-तजा महसूस करता है
तब सवाल यह उठता है की नींद में उसने ऐसा क्या किया कि जब वह सो रहा था तब वह बहुत थका हुआ था सोकर उठने के बाद वह एक दम तरो-ताजा महसूस करने लगा.
जबाव यहीं है जब व्यक्ति बहुत गहरी नींद में सोया होता है
तब यह दिव्य ऊर्जा उसके शरीर मे जाकर शरीर की सूक्ष्म टूट-फूट को repair करती है समस्त मृत कोशिकाओं को जाग्रत करती है।
आपको पूरा recharge कर देती है जिससे व्यक्ति एक दम energetic महसूस करता है
यह छोटा सा उदाहरण आपको समझाने के लिए था इस ऊर्जा से तो बहुत बड़े-बड़े कार्य भी किये जाते है
यह ऊर्जा मानव मे दो ही तरीके से असीम मात्रा मे प्रवेश करती हैं।
एक तब, जब व्यक्ति ध्यान मे बैठा हो तथा दूसरा तब, जब व्यक्ति बहुत गहरी नींद में सोया हो, परन्तु
इसमे भी एक condition है यदि व्यक्ति को नींद मे स्वप्न आ गया तो यह ऊर्जा उसकी स्वप्न देखने मे चली जायेगी।
फिर इस ऊर्जा का आपको कोई लाभ नही मिलेगा।
यह दो तरीके वह थे जो एक साधारण व्यक्ति इस ऊर्जा को प्राप्त कर सकता है एक तीसरा तरिका भी है।
जिसकी सहायता से साधकगण बहुत तेजी से आध्यात्म मे सफल हो जाते है इसकी चर्चा हम अगले लेख मे करेंगे।
ब्रह्माण्डियें ऊर्जा दीक्षा क्यों जरूरी है?