# आध्यात्म क्यो जरूरी है?Adyatm kyo zaruri hai?

आध्यात्म क्यो जरूरी है?

जब तक यह प्रश्न हल नही होगा तब तक आध्यात्म की भूमिका समझ नही आयेगी की आध्यात्म क्यो जरूरी है

मित्रों यह 72 हजार नाड़ियों से मिलकर बना यह मानव शरीर 84 लाख योनियों पूर्ण करने के बाद मिलता है

यह शरीर आपको मिला है तो यह आपको मौका दिया गया है ईश्वर द्वारा इस काल चक्र से बाहर निकलने का

आध्यात्म मे आने की उम्र क्या है?


आध्यात्म मे आपको इस जन्म मे नही तो अगले जन्म आना ही पड़ेगा, क्योकि इंसान का जन्म इसी लिए मिलता है की आप आध्यात्म के द्वारा इस कालचक्र के बंधन से मुक्त हो सके

आपको चाहिए की आप खुद को जाने की ईश्वर से आपका क्या संबंध है जिसका एक मात्र मार्ग आध्यात्म है

बस बात यहीं बिगड़ती जब व्यक्ति खुद को भूल जाता है की वह इस धरा पर क्यो आया है और उसके क्या कर्तव्य है यहीं समस्या की जड़ है

यदि कोई चाहे तो आध्यात्म मे रहकर इसे आसानी से समझ सकता है क्योकि आपके के पास सोचने, समझने, तथा स्वयं की इच्छा जैसी शक्तियां होती है जो इंसान को एक जानवर से भिन्न बनाती है

क्या? आपने किसी बकरा, घोड़ा, हाथी या किसी अन्य जानवर को कभी ध्यान करते हुए या साधना आदि करते हुए देखा है कभी नही।

क्योकि आध्यात्म को इंसान ही समझ सकता है कोई जानवर नही।

व्यक्ति अपने कर्म तथा सांसारिक कर्तव्यों को पूर्ण कर इस कालचक्र से बाहर निकल सके इसलिए आध्यात्म जरूरी है क्योकि यह आध्यात्म से ही संभव है।

# क्या होता है कालचक्र?

क्या होता है कालचक्र?

जब तक व्यक्ति इस धरा पर रहता है तब तक वह जीवन की चार अवस्थायें बाल्यावस्था, युवावस्था, वयस्कता तथा वृद्धावस्था मे परिवर्तित होता है उसके बाद उसकी मृत्यु फिर उसका जन्म होता है

इस प्रकार व्यक्ति बार-बार जन्म लेता है और बार-बार मरता है इस प्रकार जन्म-मरण की यह प्रक्रिया निरंतर कई जन्मों तक चलती रहती है इसी को कालचक्र कहा जाता है

यह क्रम तब तक चलता है जब तक वह मोक्ष धारण नही कर लेता।

# क्या होता है मुक्ती और मोक्ष मे अंतर?

कई लोग मुक्ती तथा मोक्ष को एक ही समझते जबकि यह दोनो अलग-अलग परिभाषाऐं व्यक्त करती है

मुक्ती का अर्थ होता है मरने के पश्चात् अगला जन्म तुरंत मिल जाना (अर्थात दूसरा शरीर तुरंत मिल जाना)।

मुक्ति क्या है।

यह बात सत्य है की कई लोगो की अकाल मृत्यु के कारण उन लोगों को तुरंत दूसरा जन्म नही मिलता (अर्थात मुक्ती/दूसरा शरीर नही मिलता ) उन्हें अपना बचा हुआ जीवन भूत: तथा प्रेत योनि मे रहकर पूर्ण करना होता है क्योकि उनमे प्राण तत्व की बहुत कमी होती हैं

पऐसा क्यों होता है इस विषय पर हम अगली बार बात करेंगे।

नोट :- मुक्ती पाने के लिए व्यक्ति को अपना जीवन कम-से-कम 86 वर्ष तक पूर्ण करना होता है

मोक्ष :- सुनने और समझने मे सरल करने और होने मे कठिन परन्तु हर किसी के लिए संभव है मोक्ष।

मोक्ष क्या है।

मोक्ष का अर्थ है की व्यक्ति का इस धरा पर दोबारा जन्म ना होना मोक्ष को पाने वाला व्यक्ति इस धरा पर दोबारा जन्म नही लेता वह सदा के लिए इस जन्म-मरण के बंधन से ( अर्थात काल चक्र से ) बाहर हो जाता है और वह पुन: वही पहुंच जाता है जहां से वह आया था इसी को सनातन भी कहां जाता है यही बात भगवान कृष्ण ने भी भागवत गीता मे कहीं है

# आध्यात्म की शुरूआत कैसे करें?

आध्यात्म की शुरूआत कैसे करें?

यह एक प्रश्न बहुत लोगो के मन मे रहता है की आध्यात्म की शुरूआत कैसे करें.

वैसे तो दैनिक पूजा पाठ ,ईश्वर को याद करना भी आध्यात्म का ही हिस्सा है

परन्तु मेरे अनुभव के अनुसार व्यक्ति की आध्यात्मिक शुरूआत गुरु धारण करने के बाद से शुरू होती है

चूंकी आध्यात्म एक अंधेरा रास्ता हैं जिसमे व्यक्ति गुरु की रौशनी मे गुरु का हाथ पकड़कर ही आगे बढ़ा सकता है

अत : गुरु का चयन सोच समझकर करें

जहां आपका हाथ गुरु से छूटा(अर्थात गुरु पर विश्वास लड़खड़ाया ) वही आपकी उन्नति रूक जायगी और आप वही पहुंच जाओगे जहां से निकलकर आये थे।

यह बात मै अपने अनुभव से कह रहा हूँ