शरीर विज्ञान Physiology शरीर विज्ञान एक ऐसा विज्ञान है जो हर किसी को जानना चाहिए, यह विज्ञान वह नही जो Doctorate की पढाई मे पढाया जाता है।

Doctorate की पढायी मे एक doctor आपको वही बता सकता है जो शरीर मे दिखायी देता है। लेकिन
आध्यात्मानुसार विज्ञान मे आप उस चीज के बारे मे सीखते हो जो आपको दिखायी नही देता।
मैने आपसे पिछले लेख मे भी कहा था की अदृश्य जगत का ही दूसरा नाम आध्यात्म है।
इस शरीर मे क्या कुछ है इसका ज्ञान तक आज के मनुष्य को नही है इसे साधना तो दूर की बात है।
शरीर का विभाजन
इसे को तीन लोकों मे विभाजित किया गया हैं

- स्वर्ग लोक
- भूलोक
- पाताल लोक
शरीर मे भूवनों की संख्या 14 है।

जिसमे 7 स्वर्ग तथा 7 पाताल है। जिस भूवनों पर रावण ने विजय प्राप्त की थी।
7 स्वर्ग – भूलोक, भुवर्लोक ,स्वर्लोक,महर्लोक, जन लोक,तपोलोक,सत्यलोक।
7 पाताल – अतल,वितल,सुतल,तलातल,महातल,रसातल और पाताल
इनका शरीर मे स्थान

सहसत्ररार से कंठ तक 7 स्वर्ग
कंठ से नाभि तक भूलोक
नाभि से पैर के तलवों तक 7 पाताल
इसके अतिरिक्त शरीर मे नाड़ियों की संख्या 72 हजार है जिसमे से प्रमूख नाड़ियां 3 है ईडा, पिंगला, और सुष्मना

शरीर मे उपस्थित चक्रों की संख्या चक्र 7 है

1 मूलाधार चक्र
2 स्वाधिष्ठान चक्र
3 मणिपुर चक्रों
4 अनाहत चक्रों
5 विशुद्धचक्र
6 आज्ञाचक्र
7 सहसत्ररार चक्र
इन सभी के विषय मे हम आगे आने वाले लेखों मे विस्तार से चर्चा करेंगें।
पंच प्राण , पंच कोश तथा पंच महाभूतों से बना हुआ तथा तीनो लोकों को समाहित यह शरीर ही ब्रह्माण्ड है।

इन सभी की अपनी-अपनी अलग दीक्षाऐं होती है.
जिसके विषय मे हम किसी और लेख मे चर्चा करेंगें.
इस शरीर को जिसने साध लिया समझो पूरे ब्रह्माण्ड को साध लिया ऐसा कर पाने वाला व्यक्ति एक अद्वितीय ही होता है।
ऐसा व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र मे सफल होता है।